Friday, November 02, 2018

Pradeep Tamhankar on Facebook

कॉलेजियम सिस्टम क्या होता है? कॉलेजियम सिस्टम का भारत के संविधान में कोई जिक्र नही है. यह सिस्टम 28 अक्टूबर 1998 को 3 जजों के मामले में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के जरिए प्रभाव में आया था.
कॉलेजियम सिस्टम में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और सुप्रीम कोर्ट के 4 वरिष्ठ जजों का एक फोरम जजों की नियुक्ति और तबादले की सिफारिश करता है.कॉलेजियम की सिफारिश मानना सरकार के लिए जरूरी होता है.
सुप्रीम कोर्ट तथा हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति तथा तबादलों का फैसला भी कॉलेजियम ही करता है. इसके अलावा उच्च न्यायालय के कौन से जज पदोन्‍नत होकर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे यह फैसला भी कॉलेजियम ही करता है.
NDA सरकार ने 15 अगस्त 2014 को कॉलेजियम सिस्टम की जगह NJAC (राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्त‍ि आयोग) का गठन किया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 16 अक्टूबर 2015 को राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) कानून को असंवैधानिक करार दे दिया था. इस प्रकार वर्तमान में भी जजों की नियुक्ति और तबादलों का निर्णय सुप्रीम कोर्ट का कॉलेजियम सिस्टम ही करता है.
NJAC का गठन 6 सदस्यों की सहायता से किया जाना था जिसका प्रमुख सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को बनाया जाना था इसमें सुप्रीम कोर्ट के 2 वरिष्ठ जजों, कानून मंत्री और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ीं 2 जानी-मानी हस्तियों को सदस्य के रूप में शामिल करने की बात थी.
NJAC में जिन 2 हस्तियों को शामिल किए जाने की बात कही गई थी, उनका चुनाव सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस, प्रधानमंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता या विपक्ष का नेता नहीं होने की स्थिति में लोकसभा में सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता वाली कमिटी करती. इसी पर सुप्रीम कोर्ट को सबसे ज्यादा आपत्ति थी.
ऊपर दी गयी पूरी जानकारी के आधार पर यह बात स्पष्ट हो गया है कि देश की मौजूदा कॉलेजियम व्यवस्था “पहलवान का लड़का पहलवान” बनाने की तर्ज पर “जज का लड़का जज” बनाने की जिद करके बैठी है. भले ही इन जजों से ज्यादा काबिल जज न्यायालयों में मौजूद हों.
यह प्रथा भारत जैसे लोकतान्त्रिक देश के लिए स्वास्थ्यकर नही है. कॉलेजियम सिस्टम का कोई संवैधानिक दर्जा नही है इसलिए सरकार को इसको पलटने के लिए कोई कानून लाना चाहिए ताकि भारत की न्याय व्यवस्था में काबिज कुछ घरानों का एकाधिकार ख़त्म हो जाये।
जजों को नियुक्त करने का कॉलेजियम सिस्टम इतना दोषपूर्ण है कि अधिकांश हिंदुहित विरोधी एवं वामपंथी जज ही नियुक्त होते हैं।
इसलिए कॉलेजियम सिस्टम बंद करो, बंद करो !!
सभी मित्र चाहें 2 की ही संख्या क्यो ना हो, हाथों में तख्ती, बैनर, पोस्ट ले कर हर गली, हर नुक्कड़, हर चौराहे पर कॉलेजियम सिस्टम का विरोध करें, हर दुकान पर काले बैकग्राउंड में सफेद से लिखा हुआ स्टीकर चिपका होना चाहिए कि “हम कॉलेजियम सिस्टम का विरोध करते हैं” या कॉलेजियम सिस्टम बंद करो, देश को बचाओ !!
अब समय आ गया है कि भारत की 130 करोड़ जनता अंग्रेज़ों के इस सिस्टम के विरोध में सड़कों पर आए और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के तरीके से सरकार और न्यायालय को विवश करे की वे इस सिस्टम को तत्काल प्रभाव से हटाएं !!

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